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गाड़ी छोड़ने के मांग रहा थे ₹10 हज़ार, एसएसपी से शिकायत की तो नपे चौकी इंचार्ज और मुंशी

गाड़ी छोड़ने के मांग रहा थे ₹10 हज़ार,  एसएसपी से शिकायत की तो नपे चौकी इंचार्ज और मुंशी

गाज़ियाबाद | अकसर समय बचाने या फिर बार-बार चक्कर लगाने से बचने के लिए हम पुलिस समेत सभी सरकारी दफ्तरों में रिश्वत देकर काम चलाने का प्रयास करते हैं। गलती हमारी ही है मगर परिणाम स्वरूप सरकारी कर्मचारियों को अब हर काम के बदले पैसा लेने की आदत पड़ चुकी है। यदि पैसा न दो तो ये कर्मचारी और अधिकारी कानून से अंजान जनता को विभिन्न धाराओं का हवाला देकर उन्हें डराते धमकाते हैं। रोड एक्सीडेंट और आपसी झगड़ों के मामलों में दोनों पक्षों से पैसा वसूलने के काम में तो पुलिसकर्मियों को दक्षता हासिल है। समझौता होने पर दरोगाओं को कागजी कार्यवाही नहीं करनी पड़ती और गांधी जी की तस्वीर छपे कागज भी उनकी जेब में पहुँच जाते हैं। गाज़ियाबाद की पुलिस चौकियाँ और थाने तो इस बात के लिए विख्यात हैं। लेकिन हमेशा ऐसा ही नहीं होता है। गाज़ियाबाद में कई ऐसे ईमानदार, जागरूक और जिम्मेदार नागरिक भी हैं जो अपने कर्तव्यों को बखूबी निभाना जानते हैं और समय आने पर पुलिस के अनावश्यक दबाव में नहीं आते हैं।

ऐसा ही कुछ कविनगर थाने के अंतर्गत आने वाली एक चौकी में भी हुआ। यहाँ रोड एक्सीडेंट के केस में एक बस पिछले काफी दिनों से थाने में खड़ी थी। दुर्घटना में घायल व्यक्ति इलाज का पूरा पैसा मिल जाने के बावजूद भी चौकी इंचार्ज की शय पर और अधिक पैसा ऐंठने पर तुला था। वजह साफ थी, घायल व्यक्ति को बस चालक से जितना अधिक पैसा मिलता, चौकी इंचार्ज का कमीशन भी उतना ही ज्यादा होता। उधर बस चालक का कहना था कि दुर्घटना में गलती घायल व्यक्ति की ही थी मगर हमेशा की तरह पुलिसवालों ने बड़ी गाड़ी को दोषी मानकर गाड़ी को थाने में बंद कर दिया।

बहरहाल, गरीब बस चालक जब गाड़ी और खुद की जमानत के कागज तैयार कर गाड़ी छुड़ाने पहुंचा तो चौकी इंचार्ज पूरे कागज होने के बावजूद बिना रिश्वत लिए गाड़ी छोड़ने के लिए तैयार नहीं था। चालक रिश्वत न देने पर अड़ा रहा और साथ ही “हमारा गाज़ियाबाद” की मदद से रिश्वतखोर चौकी इंचार्ज की शिकायत एसएसपी वैभव कृष्ण से कर दी। अपनी ईमानदारी के लिए मशहूर एसएसपी ने शिकायत मिलने पर बस चालक और चौकी इंचार्ज दोनों को अपने ऑफिस बुलाया जहां बस चालक ने चौकी इंचार्ज द्वारा रिश्वत मांगने की पुष्टि की। उसने बताया कि रिश्वतख़ोरी के इस मामले में थाने का एक मुंशी भी शामिल है। अब केस की जांच हो रही है और देखना होगा कि एसएसपी वैभव कृष्ण रिश्वतखोर पुलिसकर्मियों को दंडित करने में सफल होते हैं या नहीं।

“हमारा गाज़ियाबाद”
का अपने सभी जागरूक पाठकों से अनुरोध है कि वे किसी भी सरकारी कर्मचारी को रिश्वत न दें। यदि कोई सरकारी कर्मचारी या अधिकारी पैसे के लिए दबाव डालता है तो इसकी सूचना हमें 96503 58408 अथवा 88519 35215 पर दें। दोषी व्यक्ति को सजा दिलवाने में हम आपकी पूरी मदद करेंगे। आएं साथ मिलकर गाज़ियाबाद को एक भ्रष्टाचार मुक्त शहर बनाएँ।

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