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दुर्भाग्य – ईश्वर ने धन तो दिया मगर अक्ल और तहज़ीब छीन ली

दुर्भाग्य – ईश्वर ने धन तो दिया मगर अक्ल और तहज़ीब छीन ली

गाज़ियाबाद | देश के अन्य शहरों की तरह हमारे गाज़ियाबाद में भी आसान बैंक लोन, मुआवजे में मिले पैसे या दहेज में मिली कार को शान से लेकर सड़क पर निकालने वालों की कमी नहीं है। मगर जो बात हम गाज़ियाबादियों को दूसरों से अलग करती है वह है सड़क पर चलने की तमीज़। शहर का शायद ही कोई चौराहा हो जहां पर बेतरतीब खड़ी गाड़ियों की लंबी कतारें न हों। जाम का कारण बनी इन कतारों में आपको वीवीआईपी लोगों से लेकर साधारण लोग एक दूसरे में झुँझलाते और अपना गुस्सा हॉर्न पर निकालते हुए दिखाई मिलेंगे।

ऐसा नहीं है कि हम गाज़ियाबाद के निवासियों को यातायात के नियम नहीं मालूम हैं क्योंकि दिल्ली या नोएडा में प्रवेश करते ही हम सीट बेल्ट बांध कर फौरन अपनी लेन में गाड़ी चलाना शुरू कर देते हैं। दुपहिया चालकों के हेलमेट भी कोहनी या बाइक के शीशे से उतर कर उनके सिरों पर विराजमान हो जाते हैं। मगर गाज़ियाबाद में ट्रैफिक के नियमों की परवाह करने वाला कोई नहीं। यहाँ आप जब चाहे लेफ्ट लेन का रास्ता रोक कर खड़े हो जाओ, बीच सड़क पर सवारियाँ चढ़ाओ-उतारो, कट दूर हो तो विपरीत दिशा में गाड़ी चलाओ और मान कर चलो कि सीट-बेल्ट या हेलमेट लगाना तो पागलों का काम है।

यदि आप सड़कों पर फैली इस अराजकता के कारण जानने के लिए निकलेंगे तो आपको दो ही बात नज़र आएंगी, पहली गाज़ियाबाद में ट्रैफिक पुलिसकर्मियों की संख्या में भारी कमी और दूसरी यह कि जो इक्का-दुक्का ट्रैफिक पुलिसकर्मी नज़र आते हैं उनमें रातों-रात करोड़पति बनने की ललक। ट्रैफिक पुलिसकर्मियों में ऊपर से लेकर नीचे तक फैले भ्रष्टाचार यह आलम है कि शहर में तैनात सभी ट्रैफिक पुलिसकर्मियों ने अपने बॉडी कैमरे तक उतार दिए हैं। कारण – बॉडी कैमरा लगाने के बाद दोषी व्यक्ति का चालान काटना आपकी मजबूरी बन जाती है क्योंकि बॉडी कैमरे में दोषी व्यक्ति से चालान न काटने के बदले होने वाली सौदेबाजी से लेकर रिश्वत में मिले पैसे जेब में रखने तक सारी बातें रेकॉर्ड हो जाती थी।

फिलहाल गाज़ियाबाद की ट्रैफिक पुलिस जो भी चालान काटती है, उन्हें सरकारी रेकॉर्ड में दिखाना उनकी मजबूरी है। पहली मजबूरी यह है कि दफ्तर से मिले गुड वर्क के रजिस्टर में पन्ने भरने हैं और दूसरी मजबूरी यह है कि अगर दिन में 10 चालान भी नहीं काटे तो लखनऊ में बैठे पुलिस के आला अधिकारियों को क्या मुंह दिखाएंगे। वरना आपको गाजियाबाद में एसपी ट्रैफिक ऑफिस के बाहर से लेकर शहर के चौराहों तक 200 रुपये से लेकर 500 रुपये लेकर आपका ड्राइविंग लाइसेन्स और गाड़ी के कागज़ दिलवाने वाले दर्जनों दलाल मिल जाएंगे जिनमें पुलिसकर्मी और उनके रिश्तेदार भी शामिल हैं। उम्मीद करते हैं कि अपनी सख्तमिजाज़ी और ईमानदारी के लिए विख्यात पुलिस कप्तान की नज़र गाज़ियाबाद की ट्रैफिक पुलिस पर भी पड़ेगी और शहर की सड़कों को जानवरों की तरह चलने वाले कम अक्ल और बदतमीज़ ड्राइवरों से जल्द ही मुक्ति मिलेगी।

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By हमारा गाज़ियाबाद ब्यूरो : Friday 27 अप्रैल, 2018 02:54 AM Updated