अपराधमेरा गाज़ियाबाद

गाजियाबाद: बिल्डर के घर में बंधक बना लूट मामले में भाई-बहन समेत तीन गिरफ्तार

गाजियाबाद। नेहरूनगर में बिल्डर के घर हुई लूट में शनिवार को भाई बहन समेत 3 बदमाशों को गिरफ्तार किया। यह महिला बिल्डर के घर में किराएदार थी। उसी ने लूटकांड की पटकथा रची। बदमाशों ने यहां से लूटे गए जेवरातों को मुथूट फाइनेंस में गिरवी रख दिया था।

नेहरू नगर थर्ड में रहने वाले निखिल भाटी प्रॉपर्टी डीलिंग का कारोबार करते हैं। 22 फरवरी मंगलवार सुबह करीब 11:30 बजे निखिल भाटी अपने काम से बाहर थे। घर पर उनकी पत्नी प्रिया और दो बेटियां (8 वर्षीय बहन वंशिका, छह महीने की काव्या) थी। इस दौरान डोर बेल बजने पर वंशिका ने गेट खोला तो चार नकाबपोश बदमाश घर में आ घुसे और चाकू व पिस्टल की नोक पर तीनों को एक कमरे में बंधक बना दिया। उसके बाद बदमाशों ने एक-एक करके सभी कमरों में लूटपाट शुरू कर दी। करीब आधा घंटा घर का कोना-कोना खंगाल कर बदमाश 5 लाख रुपए और करीब 20 तोला जेवरात लूट कर ले गए।

पुलिस ने इस मामले में शनिवार को रविदत्त, विशाल, सुचरिता उर्फ ज्योति को गिरफ्तार किया है। तीनों मूल रूप से हरियाणा में रोहतक जिले के सापला थाना क्षेत्र स्थित ग्राम अटायल के रहने वाले हैं। आरोपियों से 29 हजार रुपए और तमंचे बरामद हुए हैं। सिहानी गेट थाने के इंस्पेक्टर सौरभ विक्रम सिंह ने बताया कि रविदत्त और सुचरिता भाई-बहन हैं। जबकि अंकित, राहुल व विक्की फरार हैं।

एसपी सिटी प्रथम निपुण अग्रवाल ने बताया कि ज्योति के पिता राज सिंह कानूनगो हैं। ज्योति पूर्व में दो साल निखिल के राकेश मार्ग स्थित मकान में किराये पर रही थी और फोन पर बातचीत करती रहती थी।

निखिल की दादी जयवती की तबीयत खराब थी और उनका 20 फरवरी को दिल्ली में आपरेशन हुआ था। बातचीत में ज्योति को पता चला कि निखिल की मां निरजेश और पिता गुलाब सिंह भाटी 22 फरवरी को जयवती को डिस्चार्ज कराने जाएंगे। इसके बाद लूट से दो दिन पहले सभी छह आरोपित आए और रेकी की। घटना वाले दिन रविदत्त, राहुल, अंकित व विशाल आए। पार्सल लेकर विशाल ने डोरबेल बजाई और निखिल की पत्नी प्रिया से कहा कि गुलाब सिंह का कोरियर है। दरवाजा खोलते ही चारों अंदर आए और विशाल ने उन्हें गन प्वाइंट पर ले लिया। छह माह की बेटी काव्या की हत्या की धमकी दे प्रिया व उनकी ननद वंशिका को बंधक बना बदमाश 4.70 लाख रुपये और 20 तोला सोने के गहने लूट ले गए थे। हालांकि लाकर न टूटने से काफी गहने बच गए थे। ज्योति ने लूटे गहनों में कुछ बेच दिए और बाकी को राकेश मार्ग स्थित मुथूट फाइनैंस की शाखा में गिरवी रख आठ हजार रुपये ऋण ले लिया।

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