राष्ट्रीय

IAS नियुक्ति पर केंद्र-राज्य आमने सामने, जानिए क्या बदलाव चाहती है मोदी सरकार

नई दिल्ली। पश्चिम बंगाल की सीएम ममता बनर्जी, राजस्थान के सीएम अशोक गहलोत के बाद छत्तीसगढ़ के सीएम भूपेश बघेल ने अखिल भारतीय सेवाओं (आईएएस) कैडर के नियमों में बदलाव पर पीएम नरेंद्र मोदी को पत्र लिखकर विरोध जताया है।

केंद्र सरकार बजट सत्र में इस संशोधन का बिल लाने की तैयारी कर रही है। अगर आईएएस काडर नियमों में संशोधन होता है तो केंद्र सरकार राज्य की आपत्तियों को दरकिनार कर अफसरों को केंद्रीय प्रतिनियुक्तियों में तैनात कर सकेगी। केंद्र सरकार ने यह कदम अपने डेप्यूटेशन रिजर्व में अधिकारियों की कमी को देखते हुए उठाया है।

क्या है वर्तमान में व्यवस्था
भारत की राज्य सरकार के कलेक्टर, उसके समकक्ष और अन्य शीर्ष अधिकारी भारतीय प्रशासिनिक सेवा के अधिकारी होते हैं. फिलहाल जो केंद्र सरकार द्वारा आईएएस अधिकारियों की नियुक्ति के नियम हैं वह आईएएस कैडर नियम 1954 के नियम 6 (1) के तहत होते हैं इसके अनुसार एक कैडर अफसर की केंद्र सरकार या दूसरी राज्य सरकार, या किसी कंपनी, किसी सरकारी संघ या व्यक्तियों के निकाय में नियुक्ति केंद्र और राज्य सरकार की सहमति से होगी। सहमति ना होने की स्थिति में केंद्र सरकार हल निकालेगी और राज्य सरकार या सरकारों को उसके फैसले को प्रभावी रूप देना होगा।”

केंद्र सरकार क्या बदलाव चाहती है?
एक महीने पहले भारत सरकार के कार्मिक एवं प्रशिक्षण विभाग ने सभी राज्य सरकारों को पत्र लिखा था कि, “कई राज्य/संयुक्त कैडर केंद्रीय डेप्यूटेशन रिजर्व के लिए केंद्रीय नियुक्ति के लिए पर्याप्त संख्या में अधिकारियों को प्रायोजित नहीं कर रहे हैं। इसका नतीजा यह है कि केंद्रीय नियुक्ति के लिए जितने भी अधिकारी उपलब्ध हैं उनकी संख्या केंद्र की आवश्यकताओं की पूर्ति के लिए पर्याप्त नहीं हैं।

पत्र में IAS कैडर रूल्स के सब सेक्शन 6 (1) में एक और शर्त जोड़ने की बात कही गई. विभाग ने कहा, “केंद्रीय डेप्युटेशन के लिए असल अधिकारियों की संख्या का निर्धारण केंद्र सरकार करेगी। इसके लिए केंद्र सरकार संबंधित राज्य सरकार/सरकारों से सलाह मशविरा करेगी। असहमति की स्थिति में राज्य सरकार/सरकारों को केंद्र सरकार के फैसले को प्रभावी रूप देना होगा। एक तय समयसीमा के अंदर।”

इन प्रस्तावों में ये भी कहा गया है कि अगर निर्धारित समय के अंदर कोई राज्य सरकार संबंधित अधिकारी को कार्यमुक्त करने में विफल रहती है, तो उसे अपने आप ही कार्यमुक्त माना जाएगा। ये भी सामने आया है कि केंद्र सरकार भारतीय पुलिस सेवा और भारतीय वन सेवा के अधिकारियों के लिए भी इसी तरह के प्रस्ताव सामने ला सकती है।

केंद्र सरकार ने पहले राज्यों से 5 जनवरी तक इन प्रस्तावों पर जवाब मांगा था। इसके लिए 27 दिसंबर को रिमाइंडर भी भेजा गया था। बाद में 12 जनवरी को राज्यों को एक और मसौदा भेजा गया। इसमें केंद्र सरकार की तरफ से लिखा गया, “जनहित में केंद्र सरकार को अगर किसी कैडर अधिकारी की सेवा जरूरी लगती है, तो वो उसे केंद्रीय डेप्युटेशन के तहत तैनात कर सकती है।”

इस पत्र पर राज्य सरकारों से 25 जनवरी तक टिप्पणियां मांगी गईं। बताया जा रहा है कि केंद्र सरकार संसद के बजट सत्र में इन संशोधनों को पेश कर सकती है। इंडियन एक्सप्रेस की रिपोर्ट के मुताबिक, इस समय पूरे देश में कुल 5,200 अधिकारी तैनात हैं. इनमें से 458 केंद्रीय डेप्युटेशन में हैं।

आपत्तियां
मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, अब तक कम से कम पांच राज्य केंद्र सरकार के इन प्रस्तावों पर लिखित तौर पर अपनी आपत्ति दर्ज करा चुके हैं। ये पांच राज्य हैं पश्चिम बंगाल, ओडिशा, मध्य प्रदेश, बिहार और मेघालय। इनमें से पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी की तरफ से प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को लिखा गया पत्र सामने आया है। सीएम ममता ने केंद्र सरकार के ऊपर गंभीर आरोप लगाए हैं। दूसरी तरफ महाराष्ट्र कैबिनेट की बैठक में भी केंद्र के इन प्रस्तावों का विरोध किया गया।

Related Articles

Leave a Reply

Your email address will not be published.