अंतर्राष्ट्रीय

परमाणु हथियार की रेस, P5 राष्ट्रों ने कहा- ‘इससे किसी को कोई लाभ नहीं होगा’

वाशिंगटन। अंतरराष्ट्रीय राजनीति में बड़े पैमाने पर विकास में स्थायी पांच (पी 5) देशों चीन, फ्रांस, रूस, ब्रिटेन और संयुक्त राज्य अमेरिका ने सोमवार को परमाणु हथियार वाले राज्यों के बीच युद्ध से बचने के संबंध में एक संयुक्त बयान जारी किया है। बयान में देशों ने रणनीतिक जोखिमों में कमी को अपनी ‘सबसे बड़ी जिम्मेदारी’ बताया है।

अमेरिका, रूस, फ्रांस, चीन और ब्रिटेन ने इस साल परमाणु संधि पर होने वाली समीक्षा बैठक से ठीक पहले यह अहम साझा बयान जारी किया है। बयान में कहा गया है, “हम पुष्टि करते हैं कि एक परमाणु युद्ध नहीं जीता जा सकता है और इसे कभी नहीं लड़ा जाना चाहिए। चूंकि परमाणु उपयोग के दूरगामी परिणाम होंगे, हम यह भी पुष्टि करते हैं कि परमाणु हथियार-जब तक वे मौजूद हैं- रक्षात्मक उद्देश्यों की पूर्ति करना चाहिए, आक्रामकता को रोकना चाहिए और युद्ध को रोकें। हम दृढ़ता से मानते हैं कि इस तरह के हथियारों के और प्रसार को रोका जाना चाहिए।”

इन पांच देशों की तरफ से यह बयान परमाणु हथियार की अप्रसार संधि (Non-Proliferation Treaty) की समीक्षा बैठक के दौरान जारी हुआ। यह संधि 1970 में लागू हुई थी। बयान को इस लिहाज से भी अहम माना जा रहा है कि अमेरिका और पश्चिमी देशों ने रूस-चीन से कई मुद्दों पर विवाद होने के बावजूद साथ आकर एनपीटी पर बात की। इन देशों की तरफ से कहा गया कि यह उनकी जिम्मेदारी है कि वे परमाणु हथियार से संपन्न देशों के बीच बढ़ते युद्ध के खतरों को कम करें।

मजेदार बात यह है कि परमाणु हथियार के प्रसार को रोकने की बात कहने वाले इन पांचों देशों के पास खुद ही एटम बम का एक बड़ा जखीरा है। स्टॉकहोम इंटरनेशनल पीस रिसर्च इंस्टीट्यूट (SIPRI) की रिपोर्ट के मुताबिक, सुरक्षा परिषद के पांच स्थायी सदस्यों के पास कुल मिलाकर 13 हजार से ज्यादा परमाणु हथियार हैं। जहां रूस के पास इस वक्त सबसे ज्यादा 6375 परमाणु हथियार हैं तो वहीं अमेरिका के पास 5800 एटम बम हैं। इसके बाद तीसरा नंबर चीन का है, जिसके पास 320 न्यूक्लियर वेपन्स हैं। फ्रांस (290) और ब्रिटेन (215) इस लिस्ट में चौथे और पांचवें नंबर पर हैं।

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