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बलात्कार मामले में सपा सरकार में मंत्री रहे गायत्री प्रजापति समेत तीन को आजीवन कारावास

लखनऊ। समाजवादी पार्टी की सरकार में कैबिनेट मंत्री रहे गायत्री प्रसाद प्रजापति को बलात्कार मामले में आजीवन कारावास और दो लाख का जुर्माने की सजा सुनाई गयी है। प्रजापति के अलावा अशोक तिवारी व आशीष शुक्ला को भी सजा सुनाई गयी है। एमपी-एमएलए कोर्ट के विशेष जज पवन कुमार राय ने गायत्री समेत तीन आरोपियों को मामले में दोषी करार दिया था। वहीं, मामले के चार अन्य अभियुक्तों को बड़ी राहत देते हुए, उन्हें कोर्ट ने मामले से बरी कर दिया है।

कोर्ट में सरकारी वकीलों ने बताया कि चित्रकूट की पीड़ित महिला ने लखनऊ के गौतम पल्ली थाने पर रिपोर्ट दर्ज कराई थी। आरोप लगाया था कि सपा सरकार में खनन मंत्री रहे गायत्री प्रजापति समेत सभी आरोपियों ने उसके साथ सामूहिक दुष्कर्म किया और उसकी नाबालिग बेटी के साथ भी दुष्कर्म का प्रयास किया।

रिपोर्ट में कहा गया था कि खनन का कार्य दिलाने के लिए आरोपियों ने महिला को लखनऊ बुलाया। इसके बाद कई जगहों पर उसके साथ दुष्कर्म किया गया। महिला का आरोप है कि उसने घटना की विस्तृत रिपोर्ट पुलिस महानिदेशक को सौंपी लेकिन कोई कार्रवाई न होने पर सुप्रीम कोर्ट में विशेष अनुमति याचिका दाखिल की। इस पर सुप्रीम कोर्ट ने आरोपियों के खिलाफ रिपोर्ट दर्ज करने का आदेश दिया था।

इलाहाबाद हाईकोर्ट की लखनऊ पीठ ने गायत्री की उस याचिका को खारिज कर दिया था, जिसमें बचाव साक्ष्य पेश करने की अर्जी को ट्रायल कोर्ट से खारिज किए जाने के आदेश को चुनौती दी गई थी। न्यायमूर्ति रमेश सिन्हा ने यह आदेश गायत्री के बेटे अनिल के जरिए सीआरपीसी की धारा 482 के तहत दायर याचिका पर दिया।  याचिका में एमपी-एमएलए न्यायालय के उस आदेश को चुनौती दी गई थी, जिसमें बचाव साक्ष्य पेश करने की अर्जी को खारिज कर दिया गया था। उधर, राज्य सरकार की तरफ  से अपर महाधिवक्ता विनोद कुमार शाही ने याचिका का विरोध किया। अदालत ने याचिका को मेरिट विहीन करार देकर खारिज कर दिया।

कब-कब, क्या-क्या हुआ
– 2013 में पीड़िता चित्रकूट के राम घाट पर गंगा आरती के एक कार्यक्रम में मौजूदा कैबिनेट मंत्री गायत्री प्रजापति से मिली।
– वर्ष 2014 में पहली बार गायत्री ने उसके साथ रेप किया, उसके बाद 2016 तक वह लगातार पीड़िता का अन्य लोगों के साथ मिलकर शारीरिक शोषण करते रहे।
– 17 अक्टूबर 2016 को पहली बार पीड़िता ने यूपी के डीजीपी को इस मामले की शिकायत दी। लेकिन कोई कार्रवाई नहीं हुई।
– 16 फरवरी 2017 को सुप्रीम कोर्ट ने यूपी पुलिस और सरकार को पीड़िता की एफआईआर दर्ज करने का आदेश दिया।
– 18 जुलाई 2017 को यूपी पुलिस ने गायत्री प्रसाद प्रजापति, विकास वर्मा, आशीष शुक्ला और अशोक तिवारी के खिलाफ विभिन्न धाराओं में केस दर्ज किया। बाद में अमरेन्द्र सिंह उर्फ पिंटू, चंद्रपाल और रूपेश्वर उर्फ रूपेश के नाम भी जोड़े गए।
– 2 नवंबर 2021 को सभी आरोपियों के बयान दर्ज किए गए।
– 8 नवंबर 2021 को कोर्ट ने मामले की सुनवाई पूरी कर ली।
– 10 नवंबर 2021 को पूर्व मंत्री गायत्री प्रसाद प्रजापति, अशोक तिवारी एवं आशीष कुमार को दोषी करार दिया। वहीं अमरेंद्र सिंह उर्फ पिंटू सिंह, विकास वर्मा चंद्रपाल और रुपेशवर उर्फ रूपेश को साक्ष्यों के अभाव में दोषमुक्त कर दिया।
– 12 नवंबर को कोर्ट ने सुजा सुनाई।

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