धर्म और अध्यात्म

दशहरा पर क्यों होता है शस्त्र पूजन

दशहरा आज यानी 15 अक्टूबर, शुक्रवार को है। हिंदू पंचांग के अनुसार, आश्विन मास की दशमी को दशहरा का त्योहार मनाया जाता है। दशहरा का त्योहार असत्य पर सत्य की जीत के यह पर्व भगवान राम का बुराई यानी रावण पर अच्छाई की जीत का प्रतीक है। भारतीय सेना हर साल दशहरा के दिन शस्त्र पूजन करती है।

प्राचीन समय में राजा अपने शत्रुओं पर विजय प्राप्त करने के लिए शस्त्र पूजन करते थे और शत्रुओं से लड़ने के लिए शस्त्रों का भी चुनाव करते थे। इस दिन देवी अपराजिता की पूजा की जाती है और इस पूजा में मां रणचंडी के साथ रहने वाली योगनियों जया और विजया को पूजा जाता है। रामायण और महाभारत काल से इस पूजा का चलन चल रहा है। भारतीय सेना आज भी इस परंपरा को निभाती है और दशहरे के दिन अस्त्र-शस्त्र की पूजा करती है।

इसी दिन जिस तरह भगवान श्रीराम ने असत्य को परास्त कर विजय हासिल की थी और मां दुर्गा ने महिषासुर नाम की बुराई का अंत किया था, उसी प्रकार दशहरे के दिन जो भी युद्ध शुरू होता है, उसमें उनकी जीत निश्चित होती थी। बताया जाता है कि भगवान राम इन्हीं दोनों देवियों की पूजा की थी, फिर अपने अस्त्र-शस्त्र की पूजन करने के बाद युद्ध के लिए निकले थे और लंका पर विजय प्राप्त की थी।

दशहरा मूल रूप से शक्ति का उत्सव है और आज के दौर में शक्ति के प्रतिक भारतीय सैनिकों के हथियार हैं, जो जनता की रक्षा करते हैं। इसलिए इनकी पूजा की जाती है।

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